जब मिलो तो जरा मूस्कूरा कर मिलो ।
आओ बैठो जरा पास आ कर मिलो।
दिल में इक दर्द है दूरीयों का मगर ।
दिल दिया है तो दिल को मिला कर मिलो।
हो गयी है ये दिलकश फिजा सबनमी।
इन गुलों से भी तो खिलखिला कर मिलो ।
खार हमने जमाने के देखे हैं सब ।
खार से यार बाहें उठा कर मिलो ।
दिल का अब तक खुला है दरीचा मेरा ।
आ भी जाओ सनम आज आ कर मिलो।
राजीव कुमार
आओ बैठो जरा पास आ कर मिलो।
दिल में इक दर्द है दूरीयों का मगर ।
दिल दिया है तो दिल को मिला कर मिलो।
हो गयी है ये दिलकश फिजा सबनमी।
इन गुलों से भी तो खिलखिला कर मिलो ।
खार हमने जमाने के देखे हैं सब ।
खार से यार बाहें उठा कर मिलो ।
दिल का अब तक खुला है दरीचा मेरा ।
आ भी जाओ सनम आज आ कर मिलो।
राजीव कुमार
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