बस यूं ही ___________
इस समंदर की तिस्नगी देखो।
दिल में कोई तो है कमी देखो।
जिससे मिलती है वो खुशी देखो।
अपने अन्दर की रौशनी देखो।
बात मजहब की कर रहे हो तो।
आग मजहब की फिर लगी देखो ।
दर्द की हद भी और क्या होगी।
लाश बच्चों की गिर गयी देखो।
जिनके रौशन चराग बुझ जाये।
घर में उनके भी तीरगी देखो।
खुशनुमा इक ख्याल है कोई।
कोई आंखों में है नमी देखो।
जब भी उल्फत में तुम कदम रक्खो।
इस जमाने की बेदिली देखो ।
चांद की चाह है सभी को पर ।
चांदनी कोख में मरी देखो।
राजीव कुमार
इस समंदर की तिस्नगी देखो।
दिल में कोई तो है कमी देखो।
जिससे मिलती है वो खुशी देखो।
अपने अन्दर की रौशनी देखो।
बात मजहब की कर रहे हो तो।
आग मजहब की फिर लगी देखो ।
दर्द की हद भी और क्या होगी।
लाश बच्चों की गिर गयी देखो।
जिनके रौशन चराग बुझ जाये।
घर में उनके भी तीरगी देखो।
खुशनुमा इक ख्याल है कोई।
कोई आंखों में है नमी देखो।
जब भी उल्फत में तुम कदम रक्खो।
इस जमाने की बेदिली देखो ।
चांद की चाह है सभी को पर ।
चांदनी कोख में मरी देखो।
राजीव कुमार
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