Friday, December 23, 2022

चsलीं ना कहियो चsले के घूमे हमनियो के

भोजपुरी ग़ज़ल 

          चsलीं ना कहियो  चsले के घूमे हमनियो के 
          निकलल बा लोग देश के जोड़े हमनियो के

          जबले  बेवाई  गोड़   में   फाटी  ना  रोड  पे
          तबले  ना  आई ठीक  से बोले  हमनियो के

          नफरत टिसाही झूठ जुलम अउर दिल के डर 
          देखीं ना के के आईल  बा रोके हमनियो के

          दियरी  के  जान बाची हवा से तबे की जब
          आई ना  मोह  जान  के  छोड़े  हमनियो के

           कबले   मुड़ि  नेवा   के  जीये  के मरे के बा 
          कहिया ले  नाही  आई  ई  पूछे हमनियो के

          सागर  से एगो  ठोप  लड़े चल  देले  बा  तs
           देहल  जाई  ना  ठोप  के  हारे  हमनियो  के

           लsड़े  के बा त उठ के लड़ भूल के ई  बात
           दुश्मन  आईल  बा  घेर के मारे हमनियो के

            आखिर   ई  प्रेम   का  ह  इहे  आरजू तs ह 
            केहू  त   नाम  ले  के   पुकारे  हमनियो  के

                         राजीव कुमार 
                         #भारत जोड़ो

सामईन (श्रोतागण) कृपया ध्यान दें

सामईन (श्रोतागण) कृपया ध्यान दें 

क्या मंच से बोला है सुना करिये सामईन 
कवियों पे नज़र आप रखा करिये सामईन

ये चाहते हैं भूख कजा मुफ्लिसी  को भूल।
जय जय किसी की आप सदा करिये सामईन

जो शेर कह रहे है वो सब जुल्म से डर के
आखिर कहां छुपे है पता करिये सामईन

कुछ भी सुना के चल दें तो मत दाद दीजीए
उंगली उठा के इन पे हंसा करिये सामईन

अपने ही दिल की लिख रहे हैं पढ़ रहे हैं सब 
ऐसे में आप अपनी कहा करिये सामईन

लोगो का जो नहीं है वो गीतों के हैं कहां 
ये भी सवाल दिल  में रखा करिये सामईन

जिनको न कोई शर्म है न फिक्र आप की
उन साहिबे अदब से बचा करिये सामईन

जो हक में आप ही के नहीं उनपे आप भी
गर हो सके तो सख्त रहा करिये सामईन

राजीव कुमार

गांव के खुश्बू भूल के गर्दा शहर के फांके आइल बा

भोजपुरी ग़ज़ल 

गांव के खुश्बू भूल के गर्दा शहर के फांके आइल बा 
असली दौलत छोड़ के नकली माल कमाये आइल बा

माई के हाथ के लिट्टी चोखा सत्तू ठेकुआ छोड़ के अब
केतना लोग शहर में छुछे रोटी खाये आइल बा

खेत बगईचा इनरा पोखर महुआ गूलर सरसों धान
जब्बो आंख मुदाइल आंख में सपना इहे आइल बा।

पहिला प्यार भइल जेकरा से अब्बो गांव में बीया ऊ
लोग दवाई छोड़ के शहर  दर्द बढ़ावे आइल बा

चांद सितारा जुगनू बारिस सगरो पिंक लिफाफा में 
रख के भेजs ले बीया बुचिया डाकीया लेके आइल बा

याद त होखबे कsरी तहके सावन के पहिला बरसात। 
माई कहे दे खs धरती पर बादर घुम्मे आइल बा

मंज़िल सामने बाटे तब्बो बइठ के सोचत बानी हम 
हमरे जइसे आखिर केतना लोग इहां ले आइल बा

गांव से शsहर जाये वाली ट्रेन प चढ़ते लागेला 
आत्मा पीछे छूट गइल बा देह अकेले आइल बा

राजीव कुमार

ज्ञान आपन बड़ावल भी हsटे बिहानदिल से नफरत मिटावल भी हsटे बिहान

ज्ञान आपन बड़ावल भी हsटे बिहान
दिल से नफरत मिटावल भी हsटे बिहान

फूल के मुस्कूरावल भी हsटे बिहान
रंग आपन देखावल भी हsटे बिहान 

सिर्फ सूरज के उगला से ना होला हो
एगो दियरी जरावल भी हsटे बिहान

गांव से दूर होखला प मालुम परल 
खेत में कुछ उगावल भी हsटे बिहान

 प्रेम जहवां बा उंहवा ए संसार में 
एक दुजे के पावल भी हsटे बिहान

झूठ के सगरो जंजाल के तूर के 
सच के चीरई उड़ावल भी हsटे बिहान

 खाली पुजला से नाहीं अनहरिया मिटी
लईकियन के पढ़ावाल भी हsटे बिहान

अन्धविश्वास जाति धरम के जहर 
सबके मन से मिटावल भी हsटे बिहान

एगो सूरज डूबा के उगावला खातिर 
छठ के दउरा उठावल भी हsटे बिहान

का महेन्दर मिसिर का भिखारी बबा 
गीत ए लो के गावल भी हsटे बिहान

राजीव कुमार

ज्ञान आपन बड़वला से होला बिहान

केहू पूछे‌ कि बिहान का होला त इ दे देब 😊

*बिहान*

ज्ञान आपन बड़वला से होला बिहान 
दिल से नफरत मिटवला से होला बिहान 

फूल के मुस्कूरवला से होला बिहान 
रंग आपन देखवला से होला बिहान 

खाली सूरज के उगला से ना होला हो
एगो दियरी जरवला से होला बिहान 

गांव से दूर होखला प मालुम परल 
खेत में कुछ उगवला से होला बिहान 

 प्रेम जहवां बा उंहवा ए संसार में 
एक दुजे के पवला से होला बिहान 

झूठ के सगरो जंजाल के तूर के 
सच के चीरई उड़़वला से होला बिहान 

 खाली पुजला से नाहीं अनहरिया मिटी
लईकियन के पढवाला से होला बिहान 

अन्धविश्वास जाति धरम के जहर 
सबके मन से मिटवला से होला बिहान 

एगो सूरज डूबा के उगावला खातिर 
छठ के दउरा उठवला से होला बिहान 

का महेन्दर मिसिर का भिखारी बबा 
गीत ए लो के गवला से होला बिहान 

राजीव कुमार

Friday, December 2, 2022

उन्निस के बात छोड़ के बाइस के ओर देख

भोजपुरी 

उन्निस के बात छोड़ के बाइस के ओर देख 
बाईस में आ के बोले लें चौबिस के ओर देख

उत्सव के साल हटे तू अमरित के बात कर  
रोटी के मोह छोड़ के किसमिस के ओर देख 

अन्याय जुल्म दर्द अउर मर चुकल समाज  
देखे के बा त शर्म से बिल्किस के ओर देख

कब्बो त अपने झूठ के चश्मा ऊतार के 
आंखी से अपने देश के मुफ्लिस के ओर देख

हमनी के हर सवाल प मी ल ता ई जवाब 
मालिक के बात छोड़ के वारिस के ओर देख 

सगरो अमीर लोग के बगली में डाल के 
क ह ता नौजवान से पूलिस के ओर देख

नफरत के आग कहियो जरा दी समूचा देश
भाई रे धर्म जात के माचिस के ओर देख

लागता देश फिल्म ह आ प्रेम चोपड़ा 
क ह तरें सूनील से नर्गिस के ओर देख

शायर R कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...