Thursday, May 28, 2020

होली दिवाली ईद की नूरी तेरे बगैर

ग़ज़ल

होली  दिवाली ईद  की नूरी तेरे बगैर
हर इक ख़ुशी है आधी अधूरी तेरे बगैर

गुलशन नदी पहाङ ये फूलों पे तितलियाँ
कुछ भी नहीं है इतना  जरूरी तेरे बगैर

तेरे बगैर कैसे मुकम्मल हो जिन्दगी
जब इक गजल न हो सकी पूरी तेरे बगैर

बस दो कदम की दूरी है कालिज से घर मगर।
लगती है साठ मील की दूरी तेरे बगैर

है खुदकुशी गुनाह तो जिन्दा हूं मैं मगर
है जिन्दगी भी गैर जरूरी तेरे बगैर

बे रंग हो गया है तेरे बाद भीमताल
बेनूर  हो गयी है मसूरी तेरे बगैर

राजीव कुमार

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