ग़ज़ल
बोल नहीं पाते तो इक दिन सचमुच में मर जाते हम
दर्द किसी का अपने दिल में कितने दिन रख पाते हम
ग़ज़लें नज़्में रिश्ते-नाते दुनियादारी जॉब अना
एक तुम्हारी ख़ातिर आख़िर किस किस को ठुकराते हम
खाली घर दो चार क़िताबें और हमारी तन्हाई
इस हालत में ख़ुद को सोचो किस हद तक बहलाते हम
सूरज चाँद सितारे बादल धरती दरिया और गगन
इतना सबकुछ खोकर कैसे शह्र तेरे रह पाते हम
ख्वाबों की वीरान सड़क पर उसको देख के लगता है
सुबह-सवेरे काश किसी दिन साथ उसे ले आते हम
जंगल की ये आग हमारे घर तक भी आ सकती है
कोई समझने वाला होता तो उसको समझते हम
बाग़-बगीचे फूल-परिंदे पेड़-नदी तालाब-कुआँ
आने वाली नस्लों को भी काश ये सब दे जाते हम
राजीव कुमार
बोल नहीं पाते तो इक दिन सचमुच में मर जाते हम
दर्द किसी का अपने दिल में कितने दिन रख पाते हम
ग़ज़लें नज़्में रिश्ते-नाते दुनियादारी जॉब अना
एक तुम्हारी ख़ातिर आख़िर किस किस को ठुकराते हम
खाली घर दो चार क़िताबें और हमारी तन्हाई
इस हालत में ख़ुद को सोचो किस हद तक बहलाते हम
सूरज चाँद सितारे बादल धरती दरिया और गगन
इतना सबकुछ खोकर कैसे शह्र तेरे रह पाते हम
ख्वाबों की वीरान सड़क पर उसको देख के लगता है
सुबह-सवेरे काश किसी दिन साथ उसे ले आते हम
जंगल की ये आग हमारे घर तक भी आ सकती है
कोई समझने वाला होता तो उसको समझते हम
बाग़-बगीचे फूल-परिंदे पेड़-नदी तालाब-कुआँ
आने वाली नस्लों को भी काश ये सब दे जाते हम
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment