ग़ज़ल
कुछ पता ही नहीं किधर हैं सब
इश्क में इतने बेखबर हैं सब
सारी दुनिया खिलाफ है लेकिन
तेरे आशिक तो तेरे दर हैं सब
जिन्दगी आशिकी अकेला पन
आज कल ये भी ताक पर हैं सब
छोड़ कर हमको बढ़ गये आगे
जिनको सोचा था हमसफर हैं सब।
प्यार को लव जिहाद कहते हैं।
वो जो कहते हैं जानवर हैं सब
राजीव कुमार
कुछ पता ही नहीं किधर हैं सब
इश्क में इतने बेखबर हैं सब
सारी दुनिया खिलाफ है लेकिन
तेरे आशिक तो तेरे दर हैं सब
जिन्दगी आशिकी अकेला पन
आज कल ये भी ताक पर हैं सब
छोड़ कर हमको बढ़ गये आगे
जिनको सोचा था हमसफर हैं सब।
प्यार को लव जिहाद कहते हैं।
वो जो कहते हैं जानवर हैं सब
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment