Friday, October 18, 2019

कुछ पता ही नहीं किधर हैं सब

ग़ज़ल

कुछ पता ही नहीं किधर हैं सब
इश्क में इतने बेखबर हैं सब

सारी दुनिया खिलाफ है लेकिन
तेरे आशिक तो तेरे दर हैं सब

जिन्दगी  आशिकी अकेला पन
आज कल ये भी ताक पर हैं सब

छोड़ कर हमको बढ़ गये आगे
जिनको सोचा था हमसफर हैं सब।

प्यार को लव जिहाद कहते हैं।
वो जो कहते हैं जानवर हैं सब

राजीव कुमार

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