Monday, December 1, 2014

मेरे दिल में उतर कर रह गया हैं

ताजा गजल आप सभी के लिये

मेरे दिल में उतर कर रह गया हैं
तेरी यादो का नश्तर रह गया है

जो तेरे संग बीता था वो लम्हा।
वही आंखों में मंजर रह गया है

जला हे दिल मेरा उल्फत में जब से।
धुआं सिने के अन्दर रह गया है

मेरे उपर उछाला हर किसी ने।
तेरे हाथों में पत्थर रह गया हे।

सफर पर साथ तो निकला था मेरे।
मगर रस्ते में रहबर रह गया है।

किया है कत्ल जबसे दुश्मनी का।
बहुत मायूस खंजर रह गया है।

जरा बदली जो छायी आसमां में ।
सहम कर मेरा छप्पर रह गया है।

खुदाया इस जहां में हर कोई क्युं।
मसाइल में उलझ कर रह गया हैं।

इसी दुनिया में ये इन्सान भी तो।
फकत सर्कस का जोकर रह गया है।

राजीव कुमार

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