उन्वान पर कोशिश
हुआ सख्त है तब बगावत का लहजा।
तिजारत बनी जब हूकूमत का लहजा।
जूबां पे नफासत मगर दिल में शोले ।
यही आजकल है सियासत का लहजा ।
वही जूर्म सारे अदालत वही हैं।
सभी को पता है वकालत का लहजा
तरक्की के इस दौर की है हकीकत।
सदाकत नहीं है सदाकत का लहजा ।
सिखाया नहीं बैर मजहब ने तो फिर।
है क्यूं हर किसी का अदावत का लहजा।
जरूर एक दिन आयेंगे अच्छे दिन भी ।
मगर पहले सीखो मुहब्बत का लहजा ।
राजीव कुमार
हुआ सख्त है तब बगावत का लहजा।
तिजारत बनी जब हूकूमत का लहजा।
जूबां पे नफासत मगर दिल में शोले ।
यही आजकल है सियासत का लहजा ।
वही जूर्म सारे अदालत वही हैं।
सभी को पता है वकालत का लहजा
तरक्की के इस दौर की है हकीकत।
सदाकत नहीं है सदाकत का लहजा ।
सिखाया नहीं बैर मजहब ने तो फिर।
है क्यूं हर किसी का अदावत का लहजा।
जरूर एक दिन आयेंगे अच्छे दिन भी ।
मगर पहले सीखो मुहब्बत का लहजा ।
राजीव कुमार
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