एक मतला और कुछ 🐅
मैं भी इक दिन जवाब दे दुंगा।
सबको सबका हिसाब दे दुंगा।
सारे किस्से कहानियों की मैं।
लिख के कोई किताब दे दुंगा।
ए समंदर मैं आज सहरा को।
तेरे हिस्से का आब दे दुंगा।
जिनसे आंखो की शर्म रखता था।
उनको आंखो से ताब दे दुंगा।
मुफलीशी जब कभी तू मांगेगी।
अच्छे दिन के खुवाब दे दुंगा।
वक्त तारीख कोई बन कर मैं।
कुछ तुझे भी खराब दे दुंगा।
तितलियां दर ब दर न होना तुम।
तुमको खिलता गुलाब दे दुंगा।
आइना सच बता न पायेगा ।
मै हर इक को नकाब दे दुंगा।
राजीव कुमार
मैं भी इक दिन जवाब दे दुंगा।
सबको सबका हिसाब दे दुंगा।
सारे किस्से कहानियों की मैं।
लिख के कोई किताब दे दुंगा।
ए समंदर मैं आज सहरा को।
तेरे हिस्से का आब दे दुंगा।
जिनसे आंखो की शर्म रखता था।
उनको आंखो से ताब दे दुंगा।
मुफलीशी जब कभी तू मांगेगी।
अच्छे दिन के खुवाब दे दुंगा।
वक्त तारीख कोई बन कर मैं।
कुछ तुझे भी खराब दे दुंगा।
तितलियां दर ब दर न होना तुम।
तुमको खिलता गुलाब दे दुंगा।
आइना सच बता न पायेगा ।
मै हर इक को नकाब दे दुंगा।
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment