गजल हजल मिक्स कुछ हट के पहली और आखिरी
जब से तेरा फ़ितूर मेरे सर पे चढ़ गया/
हसरत की सीढ़ियों से मैं अम्बर पे चढ़ गया /
शीशे के थे आरमां मेरे पत्थर थी ये दुनिया ।
शीशा उठा के हाथ में पत्थर पे चढ गया ।
दर्दो सितम के खौफ से डरता है कौन अब ।
दिल देख ले मेरा तेरे खंजर पे चढ गया।
नेता को तो हर बूंद में हिस्सा ही चाहिये ।
पीता लहूं वो देख के मच्छर पे चढ गया
खादी के इन्कलाब से भागा था जो कभी।
ले कर के जिन्स पेण्ट वो खद्दर पे चढ गया ।
हिम्मत को हाथ की भी जरूरत नहीं पङी।
ठाकुर बगैर हाथ के गब्बर पे चढ गया ।
राजीव कुमार
जब से तेरा फ़ितूर मेरे सर पे चढ़ गया/
हसरत की सीढ़ियों से मैं अम्बर पे चढ़ गया /
शीशे के थे आरमां मेरे पत्थर थी ये दुनिया ।
शीशा उठा के हाथ में पत्थर पे चढ गया ।
दर्दो सितम के खौफ से डरता है कौन अब ।
दिल देख ले मेरा तेरे खंजर पे चढ गया।
नेता को तो हर बूंद में हिस्सा ही चाहिये ।
पीता लहूं वो देख के मच्छर पे चढ गया
खादी के इन्कलाब से भागा था जो कभी।
ले कर के जिन्स पेण्ट वो खद्दर पे चढ गया ।
हिम्मत को हाथ की भी जरूरत नहीं पङी।
ठाकुर बगैर हाथ के गब्बर पे चढ गया ।
राजीव कुमार