गजल ख्याले यार को नज्र ______________
उम्र भर इश्क में सिसकियों की तरह।
मैं पिघलता रहा आंशुओं की तरह।
मुस्कुराने की है ख्वाहिसें अब मेरी ।
थोङा जी लूं मैं अब दूसरों की तरह।
रात भर ढूंढता क्या रहा क्या मिला ।
बावरा दिल मेरा जुगनुओं की तरह ।
फांसलों को बङाना भी मुम्किन नहीं।
सीने में है तु ही धङकनों की तरह।
ख्वाब में भी तेरी दीद हो जाये तो।
मन मचल जाता है मनचलों की तरह।
कैसा रिस्ता हैं ये तेरा मुझसे बता।
जिन्दगी तू है क्युं दुश्मनों की तरह।
ख्वाबों के आसमां हैं ख्यालों के पर।
चल उङें दूर तक पंछियों की तरह।
जब भी करता हुं मैं खुद से बातें तेरी।
बात होती है वो शायरों की तरह।
लाख सिकवे हैं पर ये भी सच बात है।
उसकी यादें भी हैं खुश्बूओं की तरह।
आके लग जा गले रंग दे जिन्दगी।
इस चमन की हसीं तितलियों की तरह।
राजीव कुमार
उम्र भर इश्क में सिसकियों की तरह।
मैं पिघलता रहा आंशुओं की तरह।
मुस्कुराने की है ख्वाहिसें अब मेरी ।
थोङा जी लूं मैं अब दूसरों की तरह।
रात भर ढूंढता क्या रहा क्या मिला ।
बावरा दिल मेरा जुगनुओं की तरह ।
फांसलों को बङाना भी मुम्किन नहीं।
सीने में है तु ही धङकनों की तरह।
ख्वाब में भी तेरी दीद हो जाये तो।
मन मचल जाता है मनचलों की तरह।
कैसा रिस्ता हैं ये तेरा मुझसे बता।
जिन्दगी तू है क्युं दुश्मनों की तरह।
ख्वाबों के आसमां हैं ख्यालों के पर।
चल उङें दूर तक पंछियों की तरह।
जब भी करता हुं मैं खुद से बातें तेरी।
बात होती है वो शायरों की तरह।
लाख सिकवे हैं पर ये भी सच बात है।
उसकी यादें भी हैं खुश्बूओं की तरह।
आके लग जा गले रंग दे जिन्दगी।
इस चमन की हसीं तितलियों की तरह।
राजीव कुमार
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