इन्क़लाब क्या है_____
नसों में गर्म खून हर जवान, इन्क़लाब है
जो खीच ले जमीं पे असमान, इन्क़लाब है
दमन के ठोकरों से उठ के आधियाँ जो बन गयी
वो दर्द और सितम की दास्तान इन्कलाब है
जमीन बंजारों की है तो हौसले का हल चला
उगा दे इक नयी फसल किसान इन्क़लाब है
ये आग जुल्म की है तो हमे जला न पायेगी,
के जिश्म पे पड़े हर इक निशान इन्क़लाब है
महल तेरे ही हाथ से खड़े हुए है भूल मत
तू याद रख तेरा भी ये मकान इन्कलाब है
खामोश हैं जो लब तो तू तूफान सामने समझ
हक़ों की चाह में तो ये जबान इन्कलाब है
राजीव कुमार
नसों में गर्म खून हर जवान, इन्क़लाब है
जो खीच ले जमीं पे असमान, इन्क़लाब है
दमन के ठोकरों से उठ के आधियाँ जो बन गयी
वो दर्द और सितम की दास्तान इन्कलाब है
जमीन बंजारों की है तो हौसले का हल चला
उगा दे इक नयी फसल किसान इन्क़लाब है
ये आग जुल्म की है तो हमे जला न पायेगी,
के जिश्म पे पड़े हर इक निशान इन्क़लाब है
महल तेरे ही हाथ से खड़े हुए है भूल मत
तू याद रख तेरा भी ये मकान इन्कलाब है
खामोश हैं जो लब तो तू तूफान सामने समझ
हक़ों की चाह में तो ये जबान इन्कलाब है
राजीव कुमार
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