ग़ज़ल
दिल को न बेकरार करो जाम उठाओ
ऐसा न मेरे यार करो जाम उठाओ
सर पे न ज़िद सवार करो जाम उठाओ
दिलबर न इन्तज़ार करो जाम उठाओ
धोखा फ़रेब रंज जफ़ा ज़िन्दगी के ग़म
हर एक दर-किनार करो जाम उठाओ
दैरो हरम ओ दीन धरम सबको भूला कर
साकी पे एतबार करो जाम उठाओ
अच्छा बुरा ही सोचते रहते हो हमेशा
ख़ुद से भी थोङा प्यार करो जाम उठाओ
तुमको नहीं सलीका महब्बत का सुनो तुम।
लहजे में कुछ सुधार करो जाम उठाओ
कोई न कोई ऐब यहां हर किसी में है।
ख़ुद को भी ऐबदार करो जाम उठाओ
गर ये खता है तो ये खता मेरे अजीजों
हर रोज बार बार करो जाम उठाओ
राजीव कुमार
दिल को न बेकरार करो जाम उठाओ
ऐसा न मेरे यार करो जाम उठाओ
सर पे न ज़िद सवार करो जाम उठाओ
दिलबर न इन्तज़ार करो जाम उठाओ
धोखा फ़रेब रंज जफ़ा ज़िन्दगी के ग़म
हर एक दर-किनार करो जाम उठाओ
दैरो हरम ओ दीन धरम सबको भूला कर
साकी पे एतबार करो जाम उठाओ
अच्छा बुरा ही सोचते रहते हो हमेशा
ख़ुद से भी थोङा प्यार करो जाम उठाओ
तुमको नहीं सलीका महब्बत का सुनो तुम।
लहजे में कुछ सुधार करो जाम उठाओ
कोई न कोई ऐब यहां हर किसी में है।
ख़ुद को भी ऐबदार करो जाम उठाओ
गर ये खता है तो ये खता मेरे अजीजों
हर रोज बार बार करो जाम उठाओ
राजीव कुमार
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