हमें छोटा सा छ़प्पर चाहिये था
हमें कब सारा अम्बर चाहिये था
तुम्हे क्या सच में रहबर चाहिये था
तुम्हे तो सिर्फ सेंगर चाहिये था
वही उन्नाव पर चुप हैं अभी तक।
जिन्हें पहलू का अलवर चाहिये था।
तरक्की ले के बेटा क्या करोगे ।
तुम्हें तो सम्भू रैगर चाहिये था।
करें किससे शिक़ायत हुकमरां की।
हमें ही शाह ख़ुद सर चाहिये था।
ख़ुद- सर - अभिमानी arrogant
पुराने वक्त में पत्थर के बदले
ज़माने को जवाहर चाहिये था
जवाहर = नायाब पत्थर
जमीं जर-खेज अब वो मांगते हैं।
जिन्हें हर खेत बंजर चाहिये था।
ज़र ख़ेज - उपजाऊ
अरे क्युं सर उठा रक्खा है तुमने
तुम्हें होना ही बेसर चाहिये था
राजीव कुमार
हमें कब सारा अम्बर चाहिये था
तुम्हे क्या सच में रहबर चाहिये था
तुम्हे तो सिर्फ सेंगर चाहिये था
वही उन्नाव पर चुप हैं अभी तक।
जिन्हें पहलू का अलवर चाहिये था।
तरक्की ले के बेटा क्या करोगे ।
तुम्हें तो सम्भू रैगर चाहिये था।
करें किससे शिक़ायत हुकमरां की।
हमें ही शाह ख़ुद सर चाहिये था।
ख़ुद- सर - अभिमानी arrogant
पुराने वक्त में पत्थर के बदले
ज़माने को जवाहर चाहिये था
जवाहर = नायाब पत्थर
जमीं जर-खेज अब वो मांगते हैं।
जिन्हें हर खेत बंजर चाहिये था।
ज़र ख़ेज - उपजाऊ
अरे क्युं सर उठा रक्खा है तुमने
तुम्हें होना ही बेसर चाहिये था
राजीव कुमार