फिलबदीह गजल हाजिर
दश्त दरीया और सहरा की रवानी लिख गया
आसमां पर मैं जमीं की हर कहानी लिख गया।
आसमां पर मैं जमीं की हर कहानी लिख गया।
गर कभी गलती से भी मैं हक बयानी लिख गया।
लोग कहने लग गये मैं बद जुबानी लिख गया
लोग कहने लग गये मैं बद जुबानी लिख गया
दौर ए नौ में धोती कुर्ता शेरवानी लिख गया।
मैं मेरी तहजीब की हर इक निशानी लिख गया
मैं मेरी तहजीब की हर इक निशानी लिख गया
इश्क उल्फत जुल्फ शोखी और जवानी लिख गया ।
शायरी के नाम पर सब लंतरानी लिख गया
शायरी के नाम पर सब लंतरानी लिख गया
जब तस्वुर में तुम्हारा हुस्न आया जानेजां।
यक ब यक मैं गुल दुपहरी रात रानी लिख गया
यक ब यक मैं गुल दुपहरी रात रानी लिख गया
हर्फ जिन्दा हो गये तेरी गजल के ए खुदा
तू दरख्तो पर परिन्दों की कहानी लिख गया ।
तू दरख्तो पर परिन्दों की कहानी लिख गया ।
आज वो ही ले रहा हे लुत्फ अच्छे दिन के सब।
जो यहां वादों को जुमलों की जबानी लिख गया ।
जो यहां वादों को जुमलों की जबानी लिख गया ।
राजीव कुमार
लंतरानी --- डींगे मारना
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