*आप को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं*
ख़ुदा की मुझ पे रहमत हो गयी है
फ़कीरी मेरी शोहरत हो गयी है।
जिसे मुझसे शिकायत हो गयी थी
उसे मुझसे मुहब्बत हो गयी है
लगे कटने शजर जब से यहां पर
परिंदों को मुसीबत हो गयी है
हे जिनके हाथ में परचम अमन का।
उन्हीं की आज दहशत हो गयी है
तितलियाँ आ रहीं हैं तेरी जानिब।
गुलों सी तेरी रंगत हो गयी हे ।
किया है क़त्ल जब से बुज़दिल का।
रक़ीबों से मोहब्बत हो गयी है।
किसी के पास तूफ़ां है तो लाये ।
मुझे मिलने की हसरत हो गयी है
गिरावट देख कर किरदार में अब।
पढे-लिक्खों से नफ़रत हो गयी है
हुई हिम्मत जवां तो यार मेरे
मुक़द्दर को फ़ज़ीहत हो गयी है
वफ़ा ईमान ग़ैरत क्या सँभालूँ ।
बङी मुश्किल रिफ़ाक़त हो गयी है।
*दिया दिल में मेरे जलने लगा तो ।*
*दिवाली ख़ूबसूरत हो गयी है*
राजीव कुमार
रिफ़ाक़त-- दोस्ती
ख़ुदा की मुझ पे रहमत हो गयी है
फ़कीरी मेरी शोहरत हो गयी है।
जिसे मुझसे शिकायत हो गयी थी
उसे मुझसे मुहब्बत हो गयी है
लगे कटने शजर जब से यहां पर
परिंदों को मुसीबत हो गयी है
हे जिनके हाथ में परचम अमन का।
उन्हीं की आज दहशत हो गयी है
तितलियाँ आ रहीं हैं तेरी जानिब।
गुलों सी तेरी रंगत हो गयी हे ।
किया है क़त्ल जब से बुज़दिल का।
रक़ीबों से मोहब्बत हो गयी है।
किसी के पास तूफ़ां है तो लाये ।
मुझे मिलने की हसरत हो गयी है
गिरावट देख कर किरदार में अब।
पढे-लिक्खों से नफ़रत हो गयी है
हुई हिम्मत जवां तो यार मेरे
मुक़द्दर को फ़ज़ीहत हो गयी है
वफ़ा ईमान ग़ैरत क्या सँभालूँ ।
बङी मुश्किल रिफ़ाक़त हो गयी है।
*दिया दिल में मेरे जलने लगा तो ।*
*दिवाली ख़ूबसूरत हो गयी है*
राजीव कुमार
रिफ़ाक़त-- दोस्ती
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