तरही गजल
कब दीवानापन देखा है
तुमने सिर्फ सुखन देखा है
तुमने सिर्फ सुखन देखा है
दिल में रहने वालों ने कब
आंखो में सावन देखा है
आंखो में सावन देखा है
बेबस बेकल चंचल कोमल।
हमने सबका मन देखा है
हमने सबका मन देखा है
दुनिया को समझाने वालों।
क्या तुमने दरपन देखा है
क्या तुमने दरपन देखा है
रस्ते में मिलता है अक्सर ।
हमने वो रहजन देखा है।
हमने वो रहजन देखा है।
दिलवालों को इस दुनिया ने।
जाने क्यूं दुश्मन देखा हे।
हमने तुमको खो कर जांना।
जाने क्यूं दुश्मन देखा हे।
हमने तुमको खो कर जांना।
बस आवारापन देखा है
राजीव कुमार
दो बोनस शेर
सबके खाते में आयेगा ।
किसने काला धन देखा हे।
किसने काला धन देखा हे।
आधे से ज्यादा हैं खाली ।
क्या तुमने जनधन देखा हे
क्या तुमने जनधन देखा हे
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