गजल-राजधानी दिल्ली के एम्स हस्पताल से होते हुए आप तक
आने से पहले मौत मजा चाहते हैं लोग।
हर कर्ज जिन्दगी का अदा चाहते हैं लोग
हर कर्ज जिन्दगी का अदा चाहते हैं लोग
ये भीङ हस्पताल की कहती है चीख कर।
दर्दों के सताये हैं दवा चाहते हैं लोग।
दर्दों के सताये हैं दवा चाहते हैं लोग।
दुनियां में लाईलाज मर्ज जब से हो गये।
तब से दवा के साथ दुआ चाहते हैं लोग।
तब से दवा के साथ दुआ चाहते हैं लोग।
कंधे पे ढो रहे हैं खुद अपने ही जिस्म को।
सीने में जिन्दगी की हवा चाहते हैं लोग।
सीने में जिन्दगी की हवा चाहते हैं लोग।
आखिर में जंग हारने का गम नहीं कोई।
जीने का वक्त और जरा चाहते हैं लोग।
जीने का वक्त और जरा चाहते हैं लोग।
दिल के मरीज जितने थे सबने यही कहा।
हर रोज जख्म दिल पे नया चाहते है लोग।
हर रोज जख्म दिल पे नया चाहते है लोग।
जाने भी दीजिए मैं गजल और क्या कहुं।
अश्कों से जो निकले वो सदा चाहते हैं लोग ।
अश्कों से जो निकले वो सदा चाहते हैं लोग ।
राजीव कुमार