Monday, April 28, 2014

इनके हिस्से में खुशी कितनी दर्द कितना है,

नयी गज़ल़

इनके हिस्से में खुशी कितनी दर्द कितना है,
इन किसानो से ना पुछो कि कर्ज कितना है/

वो जो सोते है रजाई में वो बता देंगे,
इन गरीबो से न पूछो कि सर्द कितना है।

हम को अब दिल की दवा दे दो हम तड़पते है,
हम बिमारों से ना पूछो कि मर्ज कितना है/

जिसको चाहें खरीद लें दुआ की दौलत से,
हम फकीरों से न पूछो कि खर्च कितना है/

राजीव कुमार

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