वक़्त तब कुछ और था ये जिंदगी कुछ और थी
वो तेरी पहली नज़र वो दिल्लगी कुछ और थी
आग पानी फूल तितली बिजलियाँ रंगीनियाँ
चाँद सूरज सब वही थे रौशनी कुछ और थी
इस शहर के मयकदों में जी रहा हूँ आज कल
पर तुम्हारे इश्क़ की वो मयकशी कुछ और थी
सच है ये भी रात दिन मिलता हूँ सबसे पर सनम
ख्वाबों में दीदार वाली आशिक़ी कुछ और थी
अब किसी का डर नहीं दुनिया समझता हूँ मगर
"कर न दो इनकार तुम" वो बेबसी कुछ और थी
सज रहे है हर जगह अब इश्क़ भी बाजार भी
याद है मुझको तुम्हारी सादगी कुछ और थी _______राजीव कुमार
वो तेरी पहली नज़र वो दिल्लगी कुछ और थी
आग पानी फूल तितली बिजलियाँ रंगीनियाँ
चाँद सूरज सब वही थे रौशनी कुछ और थी
इस शहर के मयकदों में जी रहा हूँ आज कल
पर तुम्हारे इश्क़ की वो मयकशी कुछ और थी
सच है ये भी रात दिन मिलता हूँ सबसे पर सनम
ख्वाबों में दीदार वाली आशिक़ी कुछ और थी
अब किसी का डर नहीं दुनिया समझता हूँ मगर
"कर न दो इनकार तुम" वो बेबसी कुछ और थी
सज रहे है हर जगह अब इश्क़ भी बाजार भी
याद है मुझको तुम्हारी सादगी कुछ और थी _______राजीव कुमार
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