Thursday, April 24, 2014

शायरी हो तो वो हो जाये आशिक़ों वाली

दोस्तों एक नयी ग़ज़ल आप सभी के लिए ________

रंजिशें नफ़रतें तलवार खंजरों वाली
ऐसी बातों की हर ग़ज़ल हो जाहिलों वाली

शायरी हो तो वो हो जाये आशिक़ों वाली
इश्क़ की बात हो कुछ ऐसी पागलों वाली

लबों रुखसार, हुस्न उनका क्या कहें यारों
फूल को लब नज़र को लिक्खो कातिलों वाली

उनकी जुल्फों की घनी छाँव का असर देखो
ये फिज़ा आज भी लगती है बादलों वाली

जब भी यादो में उनके अश्क़ छलक जाये तो
खूश्बू मिट्टी की  महक उट्ठे बारिशों वाली

अब तो सैलाब ही सोचे कि क्या करेगा वो
ये मोहब्बत की कश्तियाँ हैं हौसलों वाली

राजीव कुमार


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