नयी गज़ल़
इनके हिस्से में खुशी कितनी दर्द कितना है,
इन किसानो से ना पुछो कि कर्ज कितना है/
वो जो सोते है रजाई में वो बता देंगे,
इन गरीबो से न पूछो कि सर्द कितना है।
हम को अब दिल की दवा दे दो हम तड़पते है,
हम बिमारों से ना पूछो कि मर्ज कितना है/
जिसको चाहें खरीद लें दुआ की दौलत से,
हम फकीरों से न पूछो कि खर्च कितना है/
राजीव कुमार
इनके हिस्से में खुशी कितनी दर्द कितना है,
इन किसानो से ना पुछो कि कर्ज कितना है/
वो जो सोते है रजाई में वो बता देंगे,
इन गरीबो से न पूछो कि सर्द कितना है।
हम को अब दिल की दवा दे दो हम तड़पते है,
हम बिमारों से ना पूछो कि मर्ज कितना है/
जिसको चाहें खरीद लें दुआ की दौलत से,
हम फकीरों से न पूछो कि खर्च कितना है/
राजीव कुमार