किसानो की किसानी क्या है ये कर्ज़ा बताता है,
बीमारी थी भयानक आज कल ख़र्चा बताता है/
दवा दारु के बाज़ारों का मौसम भी गुलाबी है,
हकीमो के यहाँ बीमार का पर्चा बताता है
जमाना किस तरह बनता है दुश्मन इश्क़ का अक्सर,
गरम अफवाह से बाज़ार का चर्चा बताता है/
हर एक ओहदे की अपनी हैसियत होती है दफ्तर में,
असल कीमत मगर ईमान का दर्ज़ा बताता है/
राजीव कुमार
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