15 जनवरी को मेरे जन्मदिवस पर मेरे बहुत सारे मित्रों ने मुझे बधाई सन्देश दिए और सुभकामनाये भी दी. उन सभी मित्रों को दिल की गहराइयों से मेरा धन्यवाद और आभार स्वरुप भेंट है ये ग़ज़ल
सराफत छोड़ देता तो इलेक्शन लड़ गया होता
सियासत पर नहीं लिखता अगर मैं डर गया होता
कमाई से भी ज्यादा खर्च है ईमान रखने में,
समझ जाता तो अब तक दौलतों से तर गया होता/
वफ़ा ज्यादा जरुरी है किसी के इश्क़ से पहले,
अगर पहले पता होता मोहब्बत कर गया होता/
अभी भी दूर रहता हूँ हसीनो की अदाओं से
मैं जो भी हूँ,नहीं होता जो इनके दर गया होता/
ख़ुदा मिलता नहीं है ईंट पत्थर के मकानो में,
अगर मिलता तो मैँ हर एक पत्थर पर गया होता/
दुवाओं ने सम्भाला है मुझे जिन्दा भी रक्खा है,
न होते जो तुम मेरे यारों तो कब का मर गया होता/
राजीव कुमार
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