Monday, November 25, 2013

जलते लोग कौन हैं


बुलंदियों पे बैठे वो,
असल में लोग कौन हैं?
यहाँ जमी पे लेट कर,
सिसकते लोग कौन हैं?
सवाल है ये हक़ का तो,
जवाब फिर बताइये,
दमन कि आग में यहाँ पे,
जलते लोग कौन हैं ?

जो दाल रोटी के लिए,
अटकते हर दुकान में/
मुसीबतों में ही रहे ,
सदा वो इस  जहान  में /
उन्ही के हाथ से बनी,
हवेलियों में बैठ कर ,
उन्ही कि छातियों पे ये ,
टहलते लोग कौन हैं ?

जो खेत अपने सींचते,
लहू के कतरे कतरे से /
हमेशा ही डरे रहे,
हर एक जुल्म खतरे से/
ये ही जले हैं धुप में,
कभी बहे हैं बाढ़  में/
बताइये न भूख से,
मचलते लोग कौन हैं?

बड़े ही शान से हमारी
जेबें हैं जो काटते/
सियासी सरहदों में हैं,
दिलों को रोज बांटते/
उन्हें भी उनके बिल से अब,
निकाल कर बता दो तुम  /
दिखा दो, करके वायदे ,
बदलते लोग कौन हैं ?

राजीव कुमार

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