न जाने कब से तरस रहे हैं ,
ये आँख अब भी बरस रहे हैं ,
सिसकती सांसों कि आह सुन लो ,
कभी तो दिल कि भी चाह सुन लो /
मिले जरा सा शुकून जिसमे ,
कभी तो ऐसी भी बात कर लो,
मुझे खुदा से कहाँ गिला है ,
वो मस्जिदों में कहाँ मिला है /
महोब्बतों के असर में है वो ,
तुम्हे जो देखु नजर में है वो /
जो मुझको मेरा खुदा मिला दे ,
कभी तो ऐसी भी बात कर लो/
है आरजू बस तुम्हारी मुझको ,
न दूर जाओ मेरी कसम है /
कि कब तलक दिल को हम बताएं ,
कहो न कैसे ये गम छुपाये /
हाँ उम्रभर का जो साथ दे दे ,
कभी तो ऐसी भी बात कर लो /
गजल भी आशिक़ बनी तुम्हारी ,
ये इश्क़ भी है क्या एक खुमारी /
मेरी डगर तुम मेरी हो मंजिल ,
हो नज्म मेरी, मेरी गजल हो ,
जो रूह दे दे मेरी नजम को ,
कभी तो ऐसी भी बात कर लो /
Rajeev kumar
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