Tuesday, November 12, 2024

कहीं खंजर कहीं पत्थर रहा है

ग़ज़ल 

कहीं खंजर कहीं पत्थर रहा है 
महब्बत का यही मंजर रहा है

जहां के कायदों से डर रहा है 
मेरे भीतर का शायर मर रहा है

 उसे दुनिया समझ आयेगी कैसे
जो बंदा सिर्फ अपने घर रहा है

 ज़मीं पर क़ैद हैं सारे परिंदे 
 वो जिनका घर कभी अम्बर रहा है

 उसी से हो गया है इश्क़ मुझको
मुकाबिल जो मेरे अक्सर रहा है

 नहीं पापा रहे पर है सकूं ये
मेरे सर पर भी इक छप्पर रहा है

 वही साधू है अब इस दौर में जो
पुराने दौर में अजगर रहा है

सितम दिल पर हमारे करने वालों 
ये फ्लावर भी कभी फायर रहा है

राजीव कुमार

नाकामियों का दौर बदलने का मज़ा देख

आज की ग़ज़ल 

नाकामियों का दौर बदलने का मज़ा देख 
आंखों में किसी ख्वाब के पलने का मज़ा देख

पैरों से लहू अपने निकलने का मज़ा देखा 
कांटों से भरी राह पे चलने का मज़ा देख

दुनिया तो गिराती है गिरा देगी मगर यार
तू गिर गया तो गिर के सम्भलने का मज़ा देख

ये दीन धरम जात अना चोंचले हैं सब
इन सब को किसी रोज कुचलने का मज़ा देख

किस किस को मिटायेगा भला किससे लड़ेगा
तू जंग नहीं जंग के टलने का मज़ा देख

परवाने का शम्मा की महब्बत में नहीं यार
तू खुद किसी के इश्क़ में जलने का मज़ा देख

सागर के किसी छोर पे सूरज को मेरी जान 
बाहों में मेरी बैठ के ढलने का मज़ा देख

राजीव कुमार

प्रेम में पर के ई बुझाइल बा

भोजपुरी ग़ज़ल 

प्रेम में पर के ई बुझाइल बा 
दिल प केतना वजन धराइल बा

कबले रोकी पहाड़ा दरिया के 
लोर रोकला से कब रोकाइल बा

नेह, वादा आ बेवफाई के
सबके नटई में दुख बन्हाइल बा

शेर बनेला नवका प्रेमी लोग
जे पुरनिया बा ऊ डेराइल बा

दिल के दुनिया अजोर जे कइलस
उहे दियवे त अब बुताइल बा

चांद का, चांदनी का, का सूरज
उनके चेहरा में सब समाइल बा

सपना आंखी में जिनके बा उनके
नींद अच्छा से कहिया आइल बा

जेकरे खातिर बहार नइखे ऊ
फूल पतझड़ में कब फुलाइल बा 

साथ छुटला प टूट जाला लोग
हर काहानी में ई लिखाइल बा

राजीव कुमार

मुझ पर यकींन कर लें मुझे मान जायें सब

ग़ज़ल 

मुझ पर यकींन कर लें मुझे मान जायें सब 
इस बार मुझे ठीक से पहचान जायें सब

ऐसा भी नहीं है कि कोई राज हूं गहरा
ऐसा भी नहीं है कि मुझे जान जायें सब

उल्फ़त तजुर्बेकार के बस का सफर नहीं 
इस रास्ते पे जायें तो नादान जायें सब

वो जा रहे थे और मैं ये सोच रहा था।
काबा ए आशिकी से ये कुफरान जायें सब

कालेज पढ़ाई नौकरी शादी सब आम हैं 
वो काम हो जो देख के हैरान जायें सब

मुश्किल पसंद हैं जो वही लोग बस रुकें 
महफ़िल में जितने लोग हैं आसान जायें सब

घर में हो चाहे ज़हन में नाकाबिले पसंद
कूड़े में ऐसे फालतू सामान जायें सब

ये शह्र आप का है रहे आप का मगर 
जंगल से अब हमारे भी इंसान जायें सब

राजीव कुमार

कब चैन तनी मिलल दिल सच में हसल कहिया

भोजपुरी ग़ज़ल 

कब चैन तनी मिलल दिल सच में हसल कहिया 
हमनी के जिनिगिया में हमनी के चलल कहिया

ए प्रेम के पिजड़ा में जब क़ैद भइल पंछी 
का जाने जियल कहिया का जाने मरल कहिया

नवका से पुरनका ले हर जुग में जुलम भइल।
पर प्यार करे वाला केहू से डरल कहिया

बेटी के विदाई जे कइले बा उहे जानी
फुलवार अंगनवा के बिगड़ल आ बनल कहिया

इज्ज़त जे कमवलस ऊ मरियो के अमर बाटे
बाकिर ए जमाना में धनवान बचल कहिया

दुसरा के मुसीबत में अब केहू जुड़त नइखे  
इंसान ए दुनिया में इंसान रहल कहिया

पहिले से महब्बत पर पहरा बा जयादा अब ।
पर प्रेम के ई नदिया पर्वत से रुकल कहिया

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...