वहशत का दौर ऐसा भी लाया गया था दोस्त
पहरा हर इक जबां पे बिठाया गया था दोस्त
लोगो को बेवकूफ बनाया गया था दोस्त
मौतों के आकङो को छुपाया गया था दोस्त
इस डर से कहीं घाव बदन के न बोल दें
हाथों से सबके मुह को दबाया गया था दोस्त
मै चाह कर भी भूल नहीं सकता ये भी सच
लोगो का कत्ल करके बहाया गया था दोस्त
ये बात उस चमन कि है जिसका हर एक फूल
मसला गया था और जलाया गया था दोस्त
कातिल भी कत्ल करके साफ साफ बच गया
हर इक सूबूत ऐसे मिटाया गया था दोस्त
क्या-क्या कहूं मैं दौर ए तबाही के नाम पर
सांसों को फेफङों से चुराया गया था दोस्त
मातम हर एक घर में था मत पूछ किस तरह
इमेज हुक्मरां का बचाया गया था दोस्त
राजीव कुमार