Friday, June 11, 2021

वहशत का दौर ऐसा भी लाया गया था दोस्त

वहशत का दौर ऐसा भी लाया गया था दोस्त 
पहरा हर इक जबां पे बिठाया गया था दोस्त

लोगो को बेवकूफ बनाया गया था दोस्त 
मौतों के आकङो को छुपाया गया था दोस्त 

इस डर से कहीं घाव बदन के न बोल दें 
हाथों से सबके मुह को दबाया गया था दोस्त 

मै चाह कर भी भूल नहीं सकता ये भी सच 
लोगो का कत्ल करके बहाया गया था दोस्त

ये बात उस चमन कि है जिसका हर एक फूल 
मसला गया था और जलाया गया था दोस्त

कातिल भी कत्ल करके साफ साफ बच गया 
हर इक सूबूत ऐसे मिटाया गया था दोस्त

क्या-क्या कहूं मैं दौर ए तबाही के नाम पर 
सांसों को फेफङों से चुराया गया था दोस्त

मातम हर एक घर में था मत पूछ किस तरह 
इमेज हुक्मरां का बचाया गया था दोस्त 

राजीव कुमार

Saturday, June 5, 2021

हम चरागों के हक़ में तागी से

ग़ज़ल-2

हम चरागों के हक़ में तागी से
आज तक लड़ रहे हैं आंधी से

दिल की बस्ती में एक जुल्मी से
दिल लगाया है अपनी मर्जी से

बात बरसों पुरानी है लेकिन 
इश्क अब भी है उस ही लङकी से

उसका चेहरा है हर्फे उर्दू तो
उसकी आंखें हैं शह्र ए हिन्दी से

सर से पा तक गज़ल है सो यारों
उसको पढते हैं हम भी  मस्ती से

मेरी चाहत है मय की इक बोतल
और इक शेर उसकी शोखी से

इश्क की दास्ताँ यही है कि
आग की दोस्ती है पानी से

याद करके अब ऐसा लगता है
दिल लगाया था कैसी जिद्दी से

इस लिये मिल न पाये हम दोनो
कानपुर से थी वो, मै दिल्ली से

राजीव कुमार

लौट आये हैं हम बलंदी से

लौट आये हैं हम बलंदी से 
इस लिये लग रहे हैं जख्मी से 

क्यु डराते हो हमको भट्टी से 
बल नहीं जाते यूं ही रस्सी से

खाक जाये तुम्हारी ताकत पर 
हम भी डरते नहीं हैं धमकी से

क्या कोई जानता है अबके साल 
मर गये लोग कितने सर्दी से

सारे फैशन ही ओल्ड फैशन हैं
आप क्युं लड़ रहे हैं  दर्जी से

मर के जिन्दा तो हो नही सकते 
इस लिये जी रहे है सुस्ती से

राजीव कुमार

Thursday, June 3, 2021

दिल की फिजा को संवारा है इश्क ने हमको पुकारा है

गीत

दिल की फिजा को संवारा है 
इश्क ने हमको पुकारा है 
फूल पे शबनम बुला रही है किरणों को 
और जमीं पर गिरा दिया है रंगों को

ख्वाब जो था सच वो हुआ 
चाहा जिसे मिल वो गया 
होश नही है अपना हमें जरा भी

जब भी करीब आती है
दिल मे लहर उठ जाती है 
जैसे सागर में उठती हैं धारायें

मिट्टी की खुश्बू  बारिस से 
आसमां चमके आतिश से 
चाहूं उसे ही और उसी से घबराउं

जैसे शजर से परिंदा है 
इश्क उसी से जिंदा है 
बाग मे तितली फूल की रंगत बोलते है
दिल की फिजा को संवारा है 
इश्क ने हमको पुकारा है 
फूल पे शबनम बुला रही है किरणों को 
जैसे जमीं पर गिरा दिया हो हीरों को

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...