सच बताउं आप को संसार का
झूठ के आगे है सच बेकार का
डूबती हैं मुफलिसों की बस्तीयां।
किस तरह का जस्न है सरकार का
दफ्तरों के चक्करों में घुट गया
देख लीजे दम किसी लाचार का
नाम से पहचानता ही कौन है
अब जमाना है मियां आधार का
पेन पेन्सिल कुछ किताबें तख्तींयां
छोड़ीये अब काम क्या हथियार का
मंच पर चमचागीरी करते रहो
फन यही है आज के फनकार का
राजीव कुमार
झूठ के आगे है सच बेकार का
डूबती हैं मुफलिसों की बस्तीयां।
किस तरह का जस्न है सरकार का
दफ्तरों के चक्करों में घुट गया
देख लीजे दम किसी लाचार का
नाम से पहचानता ही कौन है
अब जमाना है मियां आधार का
पेन पेन्सिल कुछ किताबें तख्तींयां
छोड़ीये अब काम क्या हथियार का
मंच पर चमचागीरी करते रहो
फन यही है आज के फनकार का
राजीव कुमार
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