Wednesday, September 16, 2015

चांद सितारों वाला मंजर धोखा है

चांद सितारों वाला मंजर धोखा है
इश्क तो बाबू एक भयंकर धोखा है
जुल्फ अदायें हुस्न नजाकत तो हैं ही।
आंखों का वो झील समंदर धोखा है
दिलकश चहरे महंगे कपङे वालों के
बेटा देखो जिस्म के अंदर धोखा है।
प्याज अकङ के आज कह रहा है यारों
गाजर मूली और चुकंदर धोखा है।
उम्र के आखिरी हिस्से में मालूम हुआ।
जीवन भी तो एक निरंतर धोखा है।
राजीव कुमार

गजलों का दीवान बना कर रक्खुंगा


गजलों का दीवान बना कर रक्खुंगा
ऐसा हिन्दुस्तान बना कर रक्खुंगा ।
रस्म रवायत दुनियादारी इश्क वफा
सब मुश्किल आसान बना कर रक्खुंगा।
सहरा दरिया सागर अम्बर जाने दो।
सीने में तूफान बना कर रक्खूंगा।
कारों में सब यार मेरे अब चलते हैं
मैं कब तक ईमान बना कर रक्खुंगा ।
जीने की खातिर इस दुनियां में देखो।
थोङा तो सामान बना कर रक्खुंगा ।
धर्म इबादत और तिजारत तुम रक्खो।
मैं खुद को इन्सान बना कर रक्खुंगा ।
मिट्टी में मिल कर भी इक दिन मैं यारों ।
मिट्टी की पहचान बना कर रक्खुंगा ।
राजीव कुमार

जो खुद के वास्ते रहबर बनुंगा।

जो खुद के वास्ते रहबर बनुंगा।
गुलामी के लिये खंजर बनुगा।
रकीबों गर हुआ तो होगा ये भी।
तुम्हारे कल्ब में नश्तर बनुंगा ।
तेरे दिल के मकां में जाने जाना ।
मैं ही दीवार मैं ही दर बनुंगा ।
राजीव

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...