हमको जो लोग समझदार नज़र आते है
उन्हें हम ही बड़े लाचार नज़र आते हैं
इश्क़ जब से किया है जाने क्या हुआ तब से
हम ज़माने को गुनहगार नज़र आते हैं
उनकी यादों की शायरी को जब से थामा है
अब तो घर बार भी बेकार नज़र आते हैं
जब से आंखों में उन्हें कैद करके रक्खा है
तब से कैदी भी हवलदार नज़र आते हैं
जितने इल्जमे वफा हैं वो मेरे सर रखिये।
अजी हम ही तो खतावार नज़र आते हैं ।
जब से कीमत दिलों की लग गयी बाज़ारों में
जो थे अपने वो खरीदार नज़र आते हैं
जिनको हमदर्द रहबरी ही लूट लेती है
उनको रहजन भी मददगार नज़र आते हैं
बेखुदी कहो लो या,कहो, मेरा दीवानापन
बंद आँखों से भी सरकार नज़र आते हैं
राजीव कुमार
उन्हें हम ही बड़े लाचार नज़र आते हैं
इश्क़ जब से किया है जाने क्या हुआ तब से
हम ज़माने को गुनहगार नज़र आते हैं
उनकी यादों की शायरी को जब से थामा है
अब तो घर बार भी बेकार नज़र आते हैं
जब से आंखों में उन्हें कैद करके रक्खा है
तब से कैदी भी हवलदार नज़र आते हैं
जितने इल्जमे वफा हैं वो मेरे सर रखिये।
अजी हम ही तो खतावार नज़र आते हैं ।
जब से कीमत दिलों की लग गयी बाज़ारों में
जो थे अपने वो खरीदार नज़र आते हैं
जिनको हमदर्द रहबरी ही लूट लेती है
उनको रहजन भी मददगार नज़र आते हैं
बेखुदी कहो लो या,कहो, मेरा दीवानापन
बंद आँखों से भी सरकार नज़र आते हैं
राजीव कुमार
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