ग़म के कोहरे को तुझे चीर के आना होगा
याद रखना तेरा दुश्मन भी जमाना होगा
सारे अपने तुझे रोकेगें रकीबों की तरह
तुझको ये रश्म भी सिद्दत से निभाना होगा/
लब ए खामोश पे सैलाब ए मोहब्बत रख कर,
हाल ए दिल अपनी निगाहो से बताना होगा
जिश्म की कैद में आ जाये अगर रूह ए वफ़ा
अपने हाथों से तुझे खुद को मिटाना होगा
मुफ्त मिल जाती है शोहरत ये मुकद्दर है मगर
इश्क़ करना है तो आ करके दिखाना होगा _______
राजीव कुमार
याद रखना तेरा दुश्मन भी जमाना होगा
सारे अपने तुझे रोकेगें रकीबों की तरह
तुझको ये रश्म भी सिद्दत से निभाना होगा/
लब ए खामोश पे सैलाब ए मोहब्बत रख कर,
हाल ए दिल अपनी निगाहो से बताना होगा
जिश्म की कैद में आ जाये अगर रूह ए वफ़ा
अपने हाथों से तुझे खुद को मिटाना होगा
मुफ्त मिल जाती है शोहरत ये मुकद्दर है मगर
इश्क़ करना है तो आ करके दिखाना होगा _______
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