Friday, February 14, 2014

गम के कोहरे को तुझे चीर के आना होगा

ग़म के कोहरे को तुझे चीर के आना होगा 
याद रखना तेरा दुश्मन भी जमाना होगा

सारे अपने तुझे रोकेगें रकीबों की तरह  
तुझको ये रश्म भी सिद्दत से निभाना होगा/

लब ए खामोश पे सैलाब ए मोहब्बत रख कर, 
हाल ए दिल अपनी निगाहो से बताना होगा 

जिश्म की कैद में आ जाये अगर रूह ए वफ़ा 
अपने हाथों से तुझे खुद को मिटाना होगा 

मुफ्त मिल जाती है शोहरत ये मुकद्दर है मगर 
इश्क़ करना है तो आ करके दिखाना होगा _______

राजीव कुमार 

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