Friday, February 14, 2014

गम के कोहरे को तुझे चीर के आना होगा

ग़म के कोहरे को तुझे चीर के आना होगा 
याद रखना तेरा दुश्मन भी जमाना होगा

सारे अपने तुझे रोकेगें रकीबों की तरह  
तुझको ये रश्म भी सिद्दत से निभाना होगा/

लब ए खामोश पे सैलाब ए मोहब्बत रख कर, 
हाल ए दिल अपनी निगाहो से बताना होगा 

जिश्म की कैद में आ जाये अगर रूह ए वफ़ा 
अपने हाथों से तुझे खुद को मिटाना होगा 

मुफ्त मिल जाती है शोहरत ये मुकद्दर है मगर 
इश्क़ करना है तो आ करके दिखाना होगा _______

राजीव कुमार 

Sunday, February 9, 2014

न तुझे मिला, न मुझे मिला/

रहा गर्दिशों, में ये काफिला,
न रुका कभी, भी ये सिलसिला
मेरे दिल बता, है सुकूं कहाँ,
न तुझे मिला, न मुझे मिला/

ये तेरा मिज़ाज़, था इश्क़ का
तेरी दिललगी, थी नहीं कोई
तेरा हुस्नो इश्क़, का फैसला
तुझे क्या मिला, मुझे क्या मिला

जरा देख तो कि, हुआ है क्या
जरा सोच तुझमे, बचा है क्या
जो बसा था तुझमे, वो खो गया
न तुझे मिला, न मुझे मिला

मुझे उनसे, कोई गिला नहीं
वो चले गए, तो यही सही,
तेरी आशिक़ी, मेरा हौसला
न तुझे मिला, न मुझे मिला

_______राजीव कुमार

Wednesday, February 5, 2014

हमको सब लोग समझदार नज़र आते है

हमको जो लोग समझदार नज़र आते है
उन्हें हम ही बड़े लाचार नज़र आते हैं

इश्क़ जब से किया है जाने क्या हुआ तब से
हम ज़माने को गुनहगार नज़र आते हैं

उनकी यादों की शायरी को जब से थामा है
अब तो घर बार भी बेकार नज़र आते हैं

जब से आंखों में उन्हें कैद करके रक्खा है
तब से कैदी भी हवलदार नज़र आते हैं

जितने इल्जमे वफा हैं वो मेरे सर रखिये।
अजी हम ही तो खतावार नज़र आते हैं ।

जब से कीमत दिलों की लग गयी बाज़ारों में
जो थे अपने वो  खरीदार नज़र आते हैं

जिनको हमदर्द रहबरी ही लूट लेती है
उनको रहजन भी मददगार नज़र आते हैं

बेखुदी  कहो लो या,कहो, मेरा दीवानापन
बंद आँखों से भी सरकार नज़र आते हैं

राजीव कुमार 

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...