जख्म ऐ नासूर ना दिखाऊंगा ,
रोऊंगा उसको भी रुलाऊंगा /
जिस तरह उसने की वफ़ा मुझसे,
बेवफाई है क्या बताऊंगा/
अब तलक चुप रहा मैं गैरत में.
करके रुशवा नहीं वो हैरत में,
उशको उतना ही मैं सताउंगा,
बेवफाई है क्या बताऊंगा/
कितने अरसे से मैं न सोया था,
खवाबो में उसके में जो खोया था,
उसको भी रात भर जगाऊंगा/
बेवफाई है क्या बताऊंगा/
ख़त लिखे जो बड़े जज्बातों से,
दिल की सियाही, लहू से कांटो से/
उसके हर ख़त मैं जलाऊंगा ,
बेवफाई है क्या बताऊंगा/
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