Thursday, October 24, 2013

सैलाब तुम्हारे अंदर है

कर  ख़त्म प्रतीक्षा की घड़ियों को
अपनी शक्ति पर नाज़  करो/
उठ  जाओ  अभी  आगाज  करो ,
पुरुषार्थ   तुम्हारे  अंदर  है ,
प्यासे हैं अगर प्यासे ही सही,
हो जाये अगर अन्याय कई/
मत  दरिया  की  दरकार  करो ,
सैलाब  तुम्हारे  अंदर  है ,

नफरत  की  दुनिया  है  ये  की
नफ़रत  हमने  ही  पाला  है ,
हम  ही तो हमेशा  मरते  है ,
जब  भी  मजहब  ने  मारा  है /
अपने ही हाथो से ना तुम ,
अपना ही लहू  बेकार  करो /
प्रतिकार  करो  प्रतिकार  करो ,
आवाज  तुम्हारे  अंदर  है /

कब  तक हम  बैठे , सोचेंगे ,
किस  ओर कदम  बढ़ाना  है /
किस जगह पे हमको रुकना है ,
किस  गली  से हमको जाना है/
उठ  जाओ  छोड़  प्रथाओं  को,
ये  वक़्त  ना  यूँ  बर्बाद  करो/
स्वीकार  करो  स्वीकार  करो/
किरदार  तुम्हारे  अंदर  है/

ये धरा  धरोहर मेरी है,
ये हिन्द हिमालय मेरा है/
क्या रोक सकेगा कोई मुझे,
ये सारा आलम मेरा है /
अपने जज्बे को अम्बर से ,
ऊँचा तुम मेरे यार करो/
अहसास करो अहसास करो,
विश्वास  तुम्हारे  अंदर  है /

राजीव कुमार

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