कर ख़त्म प्रतीक्षा की घड़ियों को
अपनी शक्ति पर नाज़ करो/
उठ जाओ अभी आगाज करो ,
पुरुषार्थ तुम्हारे अंदर है ,
प्यासे हैं अगर प्यासे ही सही,
हो जाये अगर अन्याय कई/
मत दरिया की दरकार करो ,
सैलाब तुम्हारे अंदर है ,
नफरत की दुनिया है ये की
नफ़रत हमने ही पाला है ,
हम ही तो हमेशा मरते है ,
जब भी मजहब ने मारा है /
अपने ही हाथो से ना तुम ,
अपना ही लहू बेकार करो /
प्रतिकार करो प्रतिकार करो ,
आवाज तुम्हारे अंदर है /
कब तक हम बैठे , सोचेंगे ,
किस ओर कदम बढ़ाना है /
किस जगह पे हमको रुकना है ,
किस गली से हमको जाना है/
उठ जाओ छोड़ प्रथाओं को,
ये वक़्त ना यूँ बर्बाद करो/
स्वीकार करो स्वीकार करो/
किरदार तुम्हारे अंदर है/
ये धरा धरोहर मेरी है,
ये हिन्द हिमालय मेरा है/
क्या रोक सकेगा कोई मुझे,
ये सारा आलम मेरा है /
अपने जज्बे को अम्बर से ,
ऊँचा तुम मेरे यार करो/
अहसास करो अहसास करो,
विश्वास तुम्हारे अंदर है /
राजीव कुमार
अपनी शक्ति पर नाज़ करो/
उठ जाओ अभी आगाज करो ,
पुरुषार्थ तुम्हारे अंदर है ,
प्यासे हैं अगर प्यासे ही सही,
हो जाये अगर अन्याय कई/
मत दरिया की दरकार करो ,
सैलाब तुम्हारे अंदर है ,
नफरत की दुनिया है ये की
नफ़रत हमने ही पाला है ,
हम ही तो हमेशा मरते है ,
जब भी मजहब ने मारा है /
अपने ही हाथो से ना तुम ,
अपना ही लहू बेकार करो /
प्रतिकार करो प्रतिकार करो ,
आवाज तुम्हारे अंदर है /
कब तक हम बैठे , सोचेंगे ,
किस ओर कदम बढ़ाना है /
किस जगह पे हमको रुकना है ,
किस गली से हमको जाना है/
उठ जाओ छोड़ प्रथाओं को,
ये वक़्त ना यूँ बर्बाद करो/
स्वीकार करो स्वीकार करो/
किरदार तुम्हारे अंदर है/
ये धरा धरोहर मेरी है,
ये हिन्द हिमालय मेरा है/
क्या रोक सकेगा कोई मुझे,
ये सारा आलम मेरा है /
अपने जज्बे को अम्बर से ,
ऊँचा तुम मेरे यार करो/
अहसास करो अहसास करो,
विश्वास तुम्हारे अंदर है /
राजीव कुमार
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