Saturday, May 20, 2023

सियाह रात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

ताजा गज़ल

सियाह रात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी 
ग़म-ए-हयात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

जो दिल के दर्द लहू से ग़ज़ल में लिक्खे हैं
वो काग़ज़ात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

कभी उम्मीद कभी आरज़ू कभी चाहत 
अब इस बिसात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

ये ज़ख़्म ज़ख़्म नहीं हैं, जूनून है अपना 
इस एक बात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

सँवरना उनका और उस पर मचल के यूँ चलना
वो एहतियात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

सभी से इश्क़, सभी से वफ़ा, सभी  की  मदद
हम अपनी ज़ात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

किसी जहां में सुकूं हमको मिल नहीं सकता
सो क़ायनात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

हम ऐसे लोग जो आशिक़ हैं और शायर भी
वो इस जमात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

ख़िलाफ़ ज़ुल्म के हर बार जंग लिखने को 
कलम, दवात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

राजीव कुमार

Tuesday, May 16, 2023

सौ दुखन के बस एगो दवाई रहे

भोजपुरी - हमार माई 

सौ दुखन के बस एगो दवाई रहे 
घर के घर जे बनवलस ऊ माई रहे

पिट्ठा रिकवच आ भौरी खटाई रहे
सतुआ गर्मी में खिचड़ी में लाई रहे

माई हमरे ला रहे मगर गांव में 
दादी मौसी बुआ और ताई रहे

हर बुराई के जंजाल के काटेला 
माई भीतर के हमरे भलाई रहे

प्रेम बाबू जी के लागे छड़ी नियर 
माई खिसीयाये तब्बो मलाई रहे

अपने लइकन के पालल पढ़ावल खुशी
माई खातिर बस इहे लड़ाई रहे

बाबू जी नाही रहलन ए दुनिया में जब
बाबू जी के जगहिया प माई रहे

माई रsहे त जिनगी के हर मोड़ प
हर मुसीबत के पर्वत भी राई रहे

आज माई गइल त इ मालुम परल 
हमरे जिनगी के उहे कमाई रहे

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...