Sunday, May 30, 2021

हर इक नक्श उसका मिटाने से पहले

ग़ज़ल 

हर इक नक्श उसका मिटाने से पहले
मै  रोया  बहुत  खत जलाने से  पहले

कई    ख्वाहिशों  को  मिटाना  पङेगा 
बदन   की  हदों  को  मिटाने से पहले

तो  क्या  शेर  में ये भी कहना  पङेगा
मैं रखता  हूँ तुझ  को ज़माने से पहले

अजीब आदमी  है ये डरता है कितना
जो  सच  है  वही सच बताने से पहले

निभाने  का  पहले इरादा  तो कर  लो
हमे   अपना  दुश्मन  बनाने  से  पहले

न   भूलो   हमारे   लिये   है   ये मोती
कोई   आंसू   अपना  बहाने  से पहले

बहुत लोग कहते हैं अच्छा था  राजीव 
मुहब्बत  की  दुनिया में आने  से पहले

राजीव कुमार

मुसीबत से जो डर जाये वो रहबर हो नहीं सकता

ग़ज़ल 

मुसीबत   से   जो डर  जाये वो रहबर हो नहीं सकता 
चमकने    वाला   हर   पत्थर जवाहर हो नहीं सकता

ख़ुदा ख़ुद   को  समझने  लग गया है वो ज़मीं का पर 
हक़ीक़त  में  कभी  क़तरा   समन्दर   हो नहीं सकता 

व्यवस्था   वेन्टीलेटर   पर  हो  जिसकी  बादशाहत में
वो बंदा     कुछ भी हो सकता है पर्वर  हो नहीं सकता 

मुझे   अग़वा करा   दो मार   डालो या   जला  दो पर 
तुम्हारा   झूठ   मेरे    सच   से   ऊपर  हो नहीं सकता

अँधेरे  में  रहा  है   इस    लिये   ग़फ़लत  में  है   वर्ना 
कभी     ये    चाँद   सूरज  के  बराबर हो नहीं सकता

मुहब्बत   पर यक़ीं जिसको नहीं वो शख़्स दुनिया का
शहंशाह बन के   भी लोगो का अकबर हो नहीं सकता

ज़रूरत   है    हमें    इक    दूसरे   को  थामे  रहने की 
कोई   बीमार  हो   के ख़ुद   चरागर   हो  नहीं  सकता

राजीव कुमार

रहबर- पथ प्रदर्शक
जवाहर - रत्न 
अकबर -  महान
पर्वर- रक्षक
चरागर - डाक्टर

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...