मजहिया ग़ज़ल
मरज चाहत का जब संगीन होगा
तेरा आशिक भी क्वारेन्टीन होगा
करोना जब भी होगा शाइरों को।
तुम्हारा हुस्न मेडिसीन होगा
पकड़ खैनी तू इसको ठोक लेना
कि जब भी दिल तेरा गमगीन होगा
ग़ज़ल की लत हो जिसको यार उस पर
हमेशा बे-असर कोकीन होगा
मेरी आंखों से ज्यादा इस जमीं पर
समन्दर भी नहीं नमकीन होगा
कबूतर आज नेता बन रहा है
इलेक्शन बाद ये शाहीन होगा
जो कुछ भी ठीक समझो कह दो अबसे
वही इस मुल्क़ का आईन होगा
राजीव
शाहीन - बाज
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