Tuesday, December 29, 2020

मरज चाहत का जब संगीन होगा

 मजहिया ग़ज़ल


मरज चाहत का जब संगीन होगा 

तेरा आशिक भी क्वारेन्टीन होगा


करोना जब भी होगा शाइरों को।

तुम्हारा हुस्न मेडिसीन  होगा


पकड़  खैनी तू इसको ठोक लेना

कि जब भी दिल तेरा गमगीन होगा


ग़ज़ल की लत हो जिसको यार उस पर

हमेशा बे-असर कोकीन होगा


मेरी आंखों से ज्यादा इस जमीं पर

समन्दर भी नहीं नमकीन होगा 


कबूतर आज नेता बन रहा है

इलेक्शन बाद ये शाहीन होगा


जो कुछ भी ठीक समझो कह दो अबसे

वही इस मुल्क़  का आईन होगा


राजीव

शाहीन - बाज

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