भोजपुरी ग़ज़ल
कइसन इ हाल दे ख बनवले बा आदमी
जियला के सुर में खुद के मुअवले बा आदमी
बानी हरान शहर में हर ओर देख के
अपने ही लाश अपने उठवले बा आदमी
लकङी के एगो कुर्सी के पावे के चाह में
घर बार आदमी के जरवले बा आदमी
लइकन के दिनो रात मोबाइल पे देख के
लागेला का बवाल बनवले बा आदमी
पेट्रौल महंग हो गइल बा खून से जादा
अतना ले खुद भाव गिरवले बा आदमी
राजीव कुमार
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