Monday, November 30, 2020

जिनगी के चूल्हा के चइली ह खेती।

 जिनगी के चूल्हा के चइली ह खेती।

मत बुझिह  कागज के रद्दी ह खेती।


बोझा  त  माथे  के  पगड़ी  ह  अउरी।

हमनी  के  हाथे  के  मेहदी ह खेती।


कीमत  पसीना   के  मी ले  के  चाहीं।

फोकट  में करे  ला  थोड़ी  ह खेती।


रोपनी   सोहाई    कटाई   से  ले   के। 

चाउर  ह  आटा  ह  भूसी  ह  खेती ।


अइसन  ह ई  चाय  जीवन  के  जे में।

अदरक  ह  पत्ती  ह  चीनी  ह खेती।


खेती  किसानी    से  जे  दूर   बा   ऊ।

का  जानी  केतना  जरूरी ह  खेती।


हिम्मत  ह हर  काम  के  बाप  अउरी।

हर  कामयाबी  के   माई   ह  खेती।


राजीव कुमार


बानी हरान शहर में हर ओर देख के

 भोजपुरी ग़ज़ल 


कइसन इ हाल दे ख बनवले बा आदमी 

जियला के सुर में खुद के मुअवले बा आदमी


बानी हरान शहर में हर ओर देख के

अपने ही लाश अपने उठवले बा आदमी


लकङी के एगो कुर्सी के पावे के चाह में 

घर बार आदमी के जरवले बा आदमी


लइकन के दिनो रात मोबाइल पे देख के 

लागेला का बवाल बनवले बा आदमी


पेट्रौल  महंग हो गइल  बा खून से जादा 

अतना ले खुद भाव गिरवले बा आदमी


राजीव कुमार

किसान चमके जवान चमके युवा के मेहनत हमेशा चमके

भोजपुरी ग़ज़ल 

किसान  चमके  जवान चमके  युवा के मेहनत हमेशा चमके
बस एतने हमनी के चाह बाकि हमन के भारत हमेशा चमके

जिला  जवाड़ी  के लोग  आपस में  रहे  मिल  के हसी खुशी से।
हर एक  दिल में ए राम जी बस  इ एगो हसरत हमेशा चमके

न लोर गीरे   न भूख लागे    न भीख सड़कन   पे केहू मांगे।
हर एक लइका आ लईकियन के कुछ अइसे किस्मत हमेशा चमके

न ऊंच होखे   न  नीच  केहू  सभे  के  अवसर  मिले  बराबर 
बस इहे सपना  हमेशा देखे के दिल में  हिम्मत हमेशा चमके

जमीन  हरियर  आ  करिया  बादल  इहे  जरूरत  ए देश के बा
हे छठी माई   हमन के ऊपर    इहे इनायत    हमेशा   चमके

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...