ग़ज़ल
कभी यादें, कभी आँखोँ में पानी भेज देता है।
वो मुझको हिज्र की सारी निशानी भेज देता है।
वो खुद मिलने नहीं आता मगर हर रोज ख़्वाबों में।
ग़ज़ल कहने की ख़ातिर इक कहानी भेज देता है।
ये पागल दिल भी उनके इश्क के सरहद पे मरने को।
हमेशा मेरे हिस्से की जवानी भेज देता है।
मुहब्बत से उसे कुछ फोन पर कहने को बोलूं तो।
वो अपनी बात मैसेज की जुबानी भेज देता है।
वो जिसको अपनी दुनिया मानते हैं वो ही जाने क्युं।
मेरी दुनिया में अक्सर सरगिरानी भेज देता है।
नहीं मरती हैं रूहें इस लिये आदम की शक्लों में।
ख़ुदा भी सबकी ख़ातिर जिस्म फ़ानी भेज देता है।
राजीव कुमार
सरगिरानी- परेशानियों का अम्बार
कभी यादें, कभी आँखोँ में पानी भेज देता है।
वो मुझको हिज्र की सारी निशानी भेज देता है।
वो खुद मिलने नहीं आता मगर हर रोज ख़्वाबों में।
ग़ज़ल कहने की ख़ातिर इक कहानी भेज देता है।
ये पागल दिल भी उनके इश्क के सरहद पे मरने को।
हमेशा मेरे हिस्से की जवानी भेज देता है।
मुहब्बत से उसे कुछ फोन पर कहने को बोलूं तो।
वो अपनी बात मैसेज की जुबानी भेज देता है।
वो जिसको अपनी दुनिया मानते हैं वो ही जाने क्युं।
मेरी दुनिया में अक्सर सरगिरानी भेज देता है।
नहीं मरती हैं रूहें इस लिये आदम की शक्लों में।
ख़ुदा भी सबकी ख़ातिर जिस्म फ़ानी भेज देता है।
राजीव कुमार
सरगिरानी- परेशानियों का अम्बार
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