आज की फिलबदीह ग़ज़ल
हर एक शब मिरे दिल में अजाब आता है
न जाने क्यों मुझे तेरा ही ख्वाब आता है
ये किस तलाश के सहरा में आ गये हैं हम।
कदम कदम पे हमारे सराब आता है
सराब - मरीचिका
तमाम उम्र गुजारी है जिसकी हसरत में ।
वही तो बन के इन आंखों में आब आता है
है बदहवास हर इक शै हर एक मंजर क्युं
मिरे सवाल का किसको जवाब आता है ।
चलो चलें कि सितारों से बात करनी है
उन्ही के साथ साथ माहताब आता है
मिरे ख्याल का जुगनू कभी कभी यारों
ग़ज़ल की शक्ल लिये आफताब आता है ।
राजीव कुमार
हर एक शब मिरे दिल में अजाब आता है
न जाने क्यों मुझे तेरा ही ख्वाब आता है
ये किस तलाश के सहरा में आ गये हैं हम।
कदम कदम पे हमारे सराब आता है
सराब - मरीचिका
तमाम उम्र गुजारी है जिसकी हसरत में ।
वही तो बन के इन आंखों में आब आता है
है बदहवास हर इक शै हर एक मंजर क्युं
मिरे सवाल का किसको जवाब आता है ।
चलो चलें कि सितारों से बात करनी है
उन्ही के साथ साथ माहताब आता है
मिरे ख्याल का जुगनू कभी कभी यारों
ग़ज़ल की शक्ल लिये आफताब आता है ।
राजीव कुमार
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