Friday, September 15, 2017

हर एक शब मिरे दिल में अजाब आता है

आज की फिलबदीह ग़ज़ल

हर एक शब मिरे दिल में अजाब आता है
न जाने क्यों मुझे तेरा ही ख्वाब आता है

ये किस तलाश के सहरा में आ गये हैं हम।
कदम कदम पे हमारे  सराब आता है
सराब - मरीचिका

तमाम उम्र गुजारी है जिसकी हसरत में ।
वही तो बन के इन आंखों में आब आता है

है बदहवास हर इक शै हर एक मंजर क्युं
मिरे सवाल का किसको जवाब आता है ।

चलो चलें कि सितारों से बात करनी है
उन्ही के साथ साथ माहताब आता है

मिरे ख्याल का जुगनू कभी कभी यारों
ग़ज़ल की शक्ल लिये आफताब आता है ।

राजीव कुमार

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