Sunday, September 17, 2017

अपने चेहरे पे नया चेहरा लगा भी न सकूँ।

ग़ज़ल

अपने चेहरे पे नया चेहरा लगा भी न सकूँ।
आईना देख के मैं खुद को छुपा भी न सकूँ।

ये जो किस्सा ए मुहब्बत है मिरे सीने में
ये वो किस्मत का लिखा है जो मिटा भी न सकूँ।

चन्द टुकड़े है ये कागज के मगर जाने क्युँ
खत तेरे चाहूँ जला दूं तो जला भी न सकूँ।

जिस्म की हद से बहुत दूर इस लिये आया।
तू बुलाये तो कभी लौट के आ भी न  सकूँ।

मै बहारों की हिमायत तो नहीं करता हूं ।
फिर भी चाहुंगा खिजाओं को बुला भी न सकूँ ।

चोट खा कर ये मेरा दिल भी किसी बच्चे सा।
जब भी रोये मैं इसे हस के हसा भी न सकूँ।

ये जमाना है जमाने से गिला क्या करना।
खुद से लड़ के जो अगर खुद को मिटा भी न सकूँ

राजीव कुमार

Friday, September 15, 2017

हर एक शब मिरे दिल में अजाब आता है

आज की फिलबदीह ग़ज़ल

हर एक शब मिरे दिल में अजाब आता है
न जाने क्यों मुझे तेरा ही ख्वाब आता है

ये किस तलाश के सहरा में आ गये हैं हम।
कदम कदम पे हमारे  सराब आता है
सराब - मरीचिका

तमाम उम्र गुजारी है जिसकी हसरत में ।
वही तो बन के इन आंखों में आब आता है

है बदहवास हर इक शै हर एक मंजर क्युं
मिरे सवाल का किसको जवाब आता है ।

चलो चलें कि सितारों से बात करनी है
उन्ही के साथ साथ माहताब आता है

मिरे ख्याल का जुगनू कभी कभी यारों
ग़ज़ल की शक्ल लिये आफताब आता है ।

राजीव कुमार

जिन्दगी क्या है इक जुआ पगली

फिलबदीह ग़ज़ल

जिन्दगी क्या है इक जुआ पगली
कौन इसमें है जीतता पगली

जिस्म से इश्क भूल जा पगली
रूह से रूह को मिला पगली

मर्ज अपना मुझे बता पगली
मैं हूं हर मर्ज की दवा पगली

क्या इरादा है ये बता पगली
देख यूं ही न मुस्कुरा पगली

रात भर खूब शोर करता है
तेरी यादों का काफिला पगली

मेरे मन की तो जानती है तू
अपने दिल की भी तो बता पगली

इश्क क्या है तुझे बताउंगा
पहले चलते हैं मयकदा पगली

हमकदम बन के गर चलेगी तो
कट ही जायेगा रास्ता पगली

दूर तक था धुंआं धुंआं लेकिन
एक बादल भी उसमें था पगली

खोटे सिक्कों के इस जमाने में
सिक्का अपना भी तू चला पगली

तेरी आंखें बता रहीं हैं सब।
लब से कुछ भी तू मत बता पगली

नाम से मत मुझे बुलाया कर
तू भी पागल मुझे बुला पगली

जिन्दगी चार दिन की मेहमां है
यूं ही तन्हा न तू बिता पगली

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...