जनता से माल लेके अडानी बदल गइल
जब से लहू से आंख के पानी बदल गइल
हमनी के जिन्दगी के कहानी बदल गइल
रोटी पढ़ाई अउर कमाई के चाह में।
चलत चलत सड़क प जवानी बदल गइल
हालत शहर आ गांव के बदलल नाही त का?
सड़कन के नाम देख ल जानी बदल गइल
स्नेह प्रेम प्यार के जगही पे मार काट
हर ओर अब विकास के मानी बदल गइल
साधू महंत देख के अब ले हरान बा
मिल के एगो फकीर से दानी बदल गइल
राजीव कुमार