Wednesday, June 5, 2019

यानी वो फिर ग़ज़ल से नहाई हुई तो है।

ग़ज़ल

खुश्बू   तमाम   शह्र   में   लाई  हुई   तो है।
यानी  वो  फिर  ग़ज़ल  से नहाई  हुई तो है।

उम्मीद   ज़िन्दगी    की   जगाई   हुई तो है।
बोतल   में  कुछ   शराब  बचाई   हुई तो है।

मंजिल  नहीं  मिलेगी भला कब तलक हमें।
रफ़्तार   हमने   अपनी   बढ़ाई   हुई  तो है।

कुछ फायदा नहीं है छुपाने से दिल कि बात।
ये   बात   दिल   में  सबने  दबाई हुई तो है।

जंगल   पहाड़   पेड़    नदी   झील   परिंदे।
यानी   ज़मीं   किसी  ने  सजाई  हुई  तो है।

लोंगों के ज़हनो दिल में लगानी है इस दफ़ा।
शह्रों   में   आग   हमने   लगाई   हुई  तो है।

क्युं चल नहीं रही  हो  महब्बत की राह पर।
हमने   तुम्हें   वो   राह   बताई   हुई  तो  है।

जंगल   के   पेङ  काटने  वालों  ने  देखिये।
गमले  में  एक   पौध  लगाई   हुई   तो   है।

क़ैदी  बना  के  ज़िस्म  का इस रूह के लिये।
सर   पर  सभी  के   मौत  बिठाई   हुई तो है।

राजीव कुमार

Saturday, June 1, 2019

मर के ज़िन्दा हुआ मुझमें ये कोई और ही है।

ग़ज़ल

मर के  ज़िन्दा हुआ  मुझमें ये कोई और ही है।
हद से  गुजरा  हुआ मुझमें ये कोई और ही है।

मुझको जीना था सो हर ग़म से उबर आया हूं।
ग़म  में  डूबा  हुआ  मुझमे ये कोई और ही है।

अब  तो  देती  है  सूकूं  मुझको  मेरी  तन्हाई।
आह  भरता  हुआ मुझमें  ये कोई और ही है।

मैं  तो  रस्ते  में  हूँ पर   यार  मेरी मंज़िल पर।
थक के  बैठा  हुआ मुझमे ये कोई और ही है।

सबसे जीता हुआ मुझमें वो कोई और ही था।
ख़ुद से  हारा  हुआ मुझमें ये कोई और ही है।

अब  कोई  ऐसा  नहीं जिसको मनाऊं मैं भी।
मुझसे रूठा  हुआ  मुझमें ये कोई और ही है।

ज़िस्म  से रूह  ज़ुदा  यूं  ही  नहीं  हो सकती।
तुझसे बिछड़ा हुआ मुझमें ये कोई और ही है।

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...