Wednesday, February 13, 2019

जो सच है गर उसे सच हमको बतलाना नहीं आता।

ग़ज़ल

जो सच है गर उसे सच हमको बतलाना नहीं आता।
तो  हमको  झूठ से  सचमुच में टकराना नहीं आता।

कहानी  का  वो  हिस्सा भी  नहीं लगता  कहानी  है।
कि  जिस हिस्से में  यारों कोई अफ़साना नहीं आता।

सफ़र  इस ज़िन्दग़ी   का  मुश्किलों से है भरा इसमें।
वही पाता  है  मंज़िल  जिसको घबराना नहीं आता।

दरो    दीवार    कुर्सी    मेज़   बिस्तर   और   तन्हाई।
किसी को तुमसे अच्छा मुझको समझाना नहीं आता।

घुटन  वहशत  परेशानी  ये सब  तब तक ही रहते हैं।
कि जब तक  सामने आंखों के मयख़ाना नहीं आता।

बताओ  कैसे   करते  हम  मुहब्बत  इस  ज़माने  में।
हमें  सर  मार  के  पत्थर  पे  मर  जाना नहीं आता।

मियां ये  शाइरी  उसके  लिये बिल्कुल नहीं जिसको।
ख़ुद  अपने  दर्द  के  ऊपर  ही मुस्काना नहीं आता।

राजीव कुमार

Monday, February 4, 2019

कभी यादें, कभी आँखोँ में पानी भेज देता है।

ग़ज़ल

कभी  यादें,  कभी  आँखोँ  में   पानी  भेज देता है।
वो  मुझको  हिज्र  की सारी  निशानी भेज  देता है।

वो खुद मिलने नहीं आता मगर हर रोज ख़्वाबों में।
ग़ज़ल  कहने  की ख़ातिर इक कहानी भेज देता है।

ये पागल दिल भी उनके इश्क के सरहद पे मरने को।
हमेशा   मेरे   हिस्से   की   जवानी   भेज   देता  है।

मुहब्बत से  उसे  कुछ  फोन  पर  कहने को बोलूं तो।
वो  अपनी  बात  मैसेज  की   जुबानी  भेज  देता है।

वो जिसको अपनी दुनिया मानते हैं वो ही जाने क्युं।
मेरी  दुनिया  में  अक्सर  सरगिरानी  भेज  देता  है।

नहीं  मरती  हैं  रूहें  इस  लिये  आदम की शक्लों में।
ख़ुदा  भी  सबकी  ख़ातिर  जिस्म फ़ानी भेज देता है।

राजीव कुमार

सरगिरानी- परेशानियों का अम्बार

Friday, February 1, 2019

जो भी कमा रहे हो वो ज़र किसके लिये है।

ग़ज़ल 

जो भी कमा रहे हो वो ज़र किसके लिये है।
जब कोई नहीं है तो ये घर किसके लिये है।

ऐसा न हो कि आईने में देख के खुद को
हम सोचने लगे कि ये डर किस के लिये है

इस शब के बाद भी वही वीरान सा ही दिन ।
ए दिल तुझे उम्मीद ए सहर किसके लिये है।

वो छत पे आ गये तो राज खुल गया ये की
 इस तरह बेकरार कमर किसके लिये है

हर सिम्त इक दीवार नयी उठ रही है अब
आख़िर ये पत्थरों का नगर किसके लिये है

मिल कर किसी से आज समझ आ गया हमको।
अपना भी ये जवान जिगर किसके लिये है

धोखा फरेब झूठ कज़ा और  नफरतें ।
दिल में तुम्हारे इतना ज़हर किसके लिये है

आखिर में जब हयात  सिफ़र होना ही है तो
ता उम्र मुश्किलों का सफ़र किसके लिये है

राजीव कुमार
ज़र - दौलत पैसा धन
शब - रात 
सहर - सुबह
क़मर- चाँद 
सिफर - शुन्य
हयात- जीवन

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...