_ग़ज़ल
आप कहते हैं लोग सुनते हैं।
हम तो गूंगे है और बहरे हैं।
कत्लो गारत फरेब धोखे को।
कैसे देखेंगे वो जो अंधे हैं।
हुकमरानी में आप की साहब।
शाह खुश हैं किसान रोते हैं ।
बेच कर खुश हैं लोग गैरत को।
आप अब तक संम्भाले बैठे हैं।
दिल की बातें नहीं मियां हम तो।
देखिये दिल जबां पे रखते हैं।
फूल को प्यार तितलियों से है।
और पागल यहां के भौरे हैं ।
छोड़िये क्या मिलेगा नफरत से।
शह्र ए उल्फत में आज चलते हैं।
राजीव कुमार
आप कहते हैं लोग सुनते हैं।
हम तो गूंगे है और बहरे हैं।
कत्लो गारत फरेब धोखे को।
कैसे देखेंगे वो जो अंधे हैं।
हुकमरानी में आप की साहब।
शाह खुश हैं किसान रोते हैं ।
बेच कर खुश हैं लोग गैरत को।
आप अब तक संम्भाले बैठे हैं।
दिल की बातें नहीं मियां हम तो।
देखिये दिल जबां पे रखते हैं।
फूल को प्यार तितलियों से है।
और पागल यहां के भौरे हैं ।
छोड़िये क्या मिलेगा नफरत से।
शह्र ए उल्फत में आज चलते हैं।
राजीव कुमार