Thursday, April 19, 2018

आप कहते हैं लोग सुनते हैं।

_ग़ज़ल

आप  कहते  हैं   लोग   सुनते हैं।
हम  तो   गूंगे  है  और   बहरे  हैं।

कत्लो  गारत  फरेब  धोखे  को।
कैसे   देखेंगे   वो   जो   अंधे  हैं।

हुकमरानी  में  आप  की  साहब।
शाह  खुश  हैं  किसान  रोते  हैं ।

बेच  कर खुश  हैं लोग गैरत को।
आप  अब  तक  संम्भाले बैठे हैं।

दिल की बातें नहीं मियां हम तो।
देखिये  दिल  जबां  पे  रखते हैं।

फूल को  प्यार  तितलियों  से है।
और  पागल   यहां  के  भौरे  हैं ।

छोड़िये  क्या मिलेगा नफरत से।
शह्र ए उल्फत में आज चलते हैं।

राजीव कुमार

दौर ए गर्दिश से अब निकलना हैl

तरही ग़ज़ल 🙂

दौर ए गर्दिश से अब निकलना  हैl
अपने   हालात   को   बदलना  हैl

खुद से मिलना है इस लिये हमको
अपने  भीतर से अब निकलना हैl

इस  जमाने   में इश्क  करना  तो।
धूप   का  बर्फ   पे   टहलना   है l

आप  को  हमको  उम्र  भर देखोl
गिर के  उठना  है और  चलना हैl

अपने  हक  के  लिये  हूकूमत केl
अब   नहीं   टालने   से  टलना है।

जो   रीयाया   को   दर्द   देती   होl
ऐसी   सरकार   को   बदलना   हैl

इक   जवानी   में  ही   नहीं  यारोंl
हमको   हर  उम्र  में   संभलना है।

ये जो  ग़ज़लें  हैं इस  लिये  हैं  केl
दिल  हमारा  भी   तो  बहलना  है।

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...