हम भी गुंगे और वो बहरे रहेंगे॥
इस व्यवस्था में सभी ऐसे रहेंगे॥
पेङ से लटकी हुई लाशों का क्या।
लोग कुछ रोते है तो रोते रहेंगे॥
कौन किसको रोकता है जुर्म से
कत्ल भी होते थे वो होते रहेगे॥
मजहबो का सच यही है आज तक।
जो धमाके हो चुके होते रहेंगे॥
हम बगावत न करें तो क्या करें।
क्या युं ही हम भी यहां सोते रहेंगे।
राजीव
इस व्यवस्था में सभी ऐसे रहेंगे॥
पेङ से लटकी हुई लाशों का क्या।
लोग कुछ रोते है तो रोते रहेंगे॥
कौन किसको रोकता है जुर्म से
कत्ल भी होते थे वो होते रहेगे॥
मजहबो का सच यही है आज तक।
जो धमाके हो चुके होते रहेंगे॥
हम बगावत न करें तो क्या करें।
क्या युं ही हम भी यहां सोते रहेंगे।
राजीव