Friday, June 20, 2014

हम भी गुंगे और वो बहरे रहेंगे॥

हम भी गुंगे और वो बहरे रहेंगे॥
इस व्यवस्था में सभी ऐसे रहेंगे॥

पेङ से लटकी हुई लाशों का क्या।
लोग कुछ रोते है तो रोते रहेंगे॥

कौन किसको रोकता है जुर्म से
कत्ल भी होते थे वो होते रहेगे॥

मजहबो का सच यही है आज तक।
जो धमाके हो चुके होते रहेंगे॥

हम बगावत न करें तो क्या करें।
क्या युं ही हम भी यहां सोते रहेंगे।

राजीव

Saturday, June 7, 2014

ये नज्म पुरानी है फिर भी हर बार सुनाना पड़ता है

ये नज्म पुरानी है फिर भी हर बार सुनाना पड़ता है
ये इश्क़ आग का दरिया है और डूब के जाना पड़ता है

इस दौरे नौ की बुनियादों के हर जर्रे पर लिखा है
सच्चा है कोई आशिक़ तो उसी को जान से जाना पड़ता है

लैला की पाक मोहब्बत का किस्सा न कहो सब जानते हैं
औरत को ही हर बार रफीकों मान गंवाना पड़ता है

ये जुर्म हो न हो गहरा है इस लिए हर जगह पहरा है
अपने ही शहर में अपनों से खुद को ही बचाना पड़ता ह

Rajeev kumar
दौर ए नौ, --- नया जमाना
रफीको--- दोस्तो

हमें है खबर कि बीमार हो, दवा दिल की तुम भी लिया करो॥

आज की गजल उन्हे समर्पित जो दिल के करीब है। -———--------------------—--------------------
हमें है खबर कि बीमार हो, दवा दिल की तुम भी लिया करो॥ ये गजल नही है सूरुर है,इसे चुपके चुपके पिया करो। कभी जिन्दगी भी आजाब है ,कभी खुशनुमा सा ये साज है। कोई ख्वाब बन के मेरे सनम ,मेरे साथ तुम भी जिया करो ॥ ये हालात अपने नहीं तो क्या, ना खुदा से कोई गिला करो। वो रहीम है वो करीम है ,उसे सजदा तुम भी किया करो॥ वो खयाल जिन्दा है आज तक कि यहां नहीं तो वहां सही। वो हयात हो या हो जलजला मेरा साथ तुम भी दिया करो॥ मेरी राहतें मेरी चाहतें मेरी सांस सांस का सिलसिला ॥ मेरी आशिकी का हो नाम तुम मेरा नाम तुम भी लिया करो। ये फिजा हवा ये घटा चमन ये बहार और ये बिजलियां। इन्हे किस तरह से लिखुंगा मैं, जरा पर्दा तुम भी किया करो ॥ राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...