ये दर्द फिर बड़ाईये
मगर हमारे पास फिर से
लौट कर तो आइये
वफा के नाम के हसीन
ख्वाब चाहे तोड़िये
कसम है आप को हमें
न यू अकेला छोड़ीये
कली कली बहार है
फजा भी मुश्क बार है
बहुत हसीन है चमन
के पुर सूकूं बयार है
मगर नजर में हर घड़ी
तुम्हारा इन्तज़ार है
यही करारे दिल है तो
इसी का नाम प्यार है
है जी में छोड़ दूं जहां
बुला रहा है आसमां
भटक गया हूं इस कदर
पता नहीं मैं हूं कहां
मेरे शह्र में अब मेरा
न घर है ना ही आशियां
किसे बताऊं गम मेरा
किसे सुनाऊं दास्तां
तुम्ही सम्भालो दीन अब
हमें नहीं यकीन अब
मैं था बहुत मतीन पर
नहीं रहा मतीन अब
खिसक चुकी है पांव से
हमारे भी जमीन अब
जो तुम नहीं तो जीस्त में
कहां कोई है सीन अब
राजीव कुमार