Wednesday, December 20, 2017
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सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।
ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...
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जो है हमारा लेंगे हम, दमन नहीं सहेंगे हम मुकद्दरोँ से रहमतों को,अब नहीं है मांगना, असल हुकूक क्या है अब,वही है हमको जानना/ हमे हुकूक ...
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आज का हासिल @Harish Darvesh Ji जी को समिक्षार्थ प्रेषित हर एक दर्द मिटा दे हो इक ख़ुशी ऐसी। ख़ुदा करे कि मिले सबको बेहतरी ऐसी। वो खा...
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ग़ज़ल जो भी कमा रहे हो वो ज़र किसके लिये है। जब कोई नहीं है तो ये घर किसके लिये है। ऐसा न हो कि आईने में देख के खुद को हम सोचने लगे ...